E-Paperhttps://gurjarnirdeshak.in/wp-content/uploads/2024/01/jjujuu.gifगुर्जर इतिहासटॉप न्यूज़दुनियायूपी
Trending

कहानी कोतवाल धन सिंह की:1857 की क्रांति… ब्रिटिश हुकूमत पर भारी पड़ा था अकेला कोतवाल, बीच चौराहे पर दी गई थी फांसी

कहानी कोतवाल धन सिंह की:1857 की क्रांति... ब्रिटिश हुकूमत पर भारी पड़ा था अकेला कोतवाल, बीच चौराहे पर दी गई थी फांसी

1857 की क्रांति के नायक, कोतवाल धनसिंह गुर्जर, जिनकी ललकार से ब्रिटिश हुकूमत कांप उठी थी. मेरठ के विक्टोरिया पार्क जेल पर हमला कर उन्होंने न केवल 800 से ज्यादा क्रांतिकारियों को आजाद कराया, बल्कि ब्रिटिश शासकों को भी घुटनों पर ला दिया था.

मेरठ: मेरठ को क्रांति की धरती यूं ही नहीं कहा जाता. ये वह वीरभूमि है जहां से 10 मई 1857 को देश की आजादी की पहली लड़ाई का बिगुल फूंका गया था. इस प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ के सिपाही, पुलिस और आम लोग एकजुट होकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खड़े हुए थे. इस आंदोलन की अगुवाई की थी सदर थाने में तैनात कोतवाल धनसिंह गुर्जर ने जिन्हें “कोतवाल धन सिंह” के नाम से भी जाना जाता है. लोकल-18 की टीम ने स्वतंत्रता सेनानी धनसिंह कोतवाल के प्रपौत्र तस्वीर सिंह चपराना से खास बातचीत की और उनके परिवार के उस इतिहास को जाना, जो आज भी देशभक्ति की मिसाल बना हुआ है.
गांव-गांव जाकर किया था क्रांति का आह्वान
तस्वीर सिंह चपराना बताते हैं कि उनके परदादा धनसिंह कोतवाल ब्रिटिश शासन के दौरान सदर थाने में कोतवाल थे- जो उस समय किसी भारतीय के लिए सबसे बड़ा पुलिस पद हुआ करता था. जब उन्हें यह जानकारी मिली कि 85 भारतीय सैनिकों को कोर्ट मार्शल कर विक्टोरिया पार्क स्थित जेल में बंद कर दिया गया है, तो उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से अंग्रेजों के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया. धनसिंह कोतवाल की पुकार पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके साथ जुड़ गए. इसके बाद मेरठ की विक्टोरिया पार्क जेल पर हमला कर 85 भारतीय सैनिकों समेत कुल 839 क्रांतिकारियों को छुड़ाया गया. इस दौरान कई अंग्रेज अधिकारियों को भी मौत के घाट उतार दिया गया और फिर ये सभी क्रांतिकारी दिल्ली की ओर कूच कर गए.
अंग्रेजों ने गांव पर बोला तोप से हमला
तस्वीर चपराना बताते हैं कि इस विद्रोह से बौखलाए अंग्रेजों ने एक जांच कमेटी गठित की. कमेटी की रिपोर्ट में धनसिंह कोतवाल के गांव पांचली खुर्द का पूरा ब्यौरा दिया गया. रिपोर्ट के आधार पर अंग्रेजों ने पहली बार किसी गांव पर तोप से हमला बोला. अंग्रेजी सेना ने गांव के उन सभी युवाओं को निशाना बनाया, जो भविष्य में विद्रोह कर सकते थे. उन्हें तोप से उड़ा दिया गया. आसपास के दूसरे गांवों में भी क्रांतिकारियों पर ज़ुल्म ढाए गए, लेकिन क्रांति की चिंगारी अब रुकने वाली नहीं थी. यही चिंगारी आगे चलकर 1947 में देश को आज़ादी दिलाने की वजह बनी.

कौन थे धन सिंह कोतवाल, जानें उनके 10 बड़े योगदान

धन सिंह गुर्जर, जिन्हें धन सिंह कोतवाल के नाम से भी जाना जाता है, 1857 क्रांति के प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 1820 में मेरठ के पास पांचाली गाँव में हुआ था। 10 मई 1857 को, धन सिंह ने मेरठ में क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया

Dhan Singh Kotwal

 

धन सिंह गुर्जर, जिन्हें धन सिंह कोतवाल के नाम से भी जाना जाता है, 1857 क्रांति के प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 1820 में मेरठ के पास पांचाली गाँव में हुआ था। 10 मई 1857 को, धन सिंह ने मेरठ में क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई लड़ी।  उन्होंने दिल्ली पर कब्जा करने के लिए क्रांतिकारियों की सेना का नेतृत्व किया। 9 जून 1857 को, धन सिंह ने दिल्ली के लाल किले पर भारतीय झंडा फहराया। धन सिंह ने 1857 क्रांति के दौरान वीरता और नेतृत्व का प्रदर्शन किया। धन सिंह कोतवाल गुर्जर को आज भी लोग याद करते हुए  उनके शौर्य की गाथाएं गाते हैं.  मेरठ ही नहीं पूरे देश में धनसिंह कोतवाल क्रांतिकारी के नाम से जाने जाते है.  साथ ही उनके बताए मार्ग पर चलने की आने वाली पीढी को भी सीख दी जाती है…

उनकी वीरता और बलिदान ने कई लोगों को प्रेरित किया और 1857 क्रांति को फैलाने में मदद की। वे मेरठ में कोतवाली (पुलिस स्टेशन) के प्रमुख थे, जिसके कारण उन्हें “धन सिंह कोतवाल” के नाम से जाना जाता था। 10 मई 1857 को, धन सिंह ने मेरठ में क्रांति की शुरुआत की। उन्होंने क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया.  धन सिंह गुर्जर ने 1857 क्रांति के दौरान वीरता और नेतृत्व का प्रदर्शन किया।  आपको बता दें कि वर्तमान में धन सिंह कोतवाल की मूर्ति को लेकर भी विवाद चल रहा था. हालांकि मेरठ सहित पूरे देश में धन सिंह कोतवाल को वीरता के लिए जाना जाता है.

वीरता और बलिदान:  धन सिंह ने क्रांति के दौरान वीरता और साहस का प्रदर्शन किया। उन्होंने कई लड़ाइयों में ब्रिटिश सेना को हराया।  4 जुलाई 1857 को, धन सिंह को ब्रिटिश सेना ने गिरफ्तार कर लिया।  उन्हें 23 जुलाई 1857 को फांसी दे दी गई।

उनकी विरासत: धन सिंह को 1857 क्रांति के नायकों में से एक माना जाता है। उनकी वीरता और बलिदान को आज भी याद किया जाता है। मेरठ में उनकी प्रतिमा स्थापित की गई है।

धन सिंह के बारे में कुछ रोचक तथ्य: धन सिंह एक कुशल योद्धा थे। वे घुड़सवारी और तलवारबाजी में कुशल थे। वे एक कुशल नेता भी थे। उन्होंने क्रांतिकारियों को एकजुट किया और उन्हें ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ने के लिए प्रेरित किया।

10 मई 1857 को, धन सिंह ने 85 सिपाहियों को जेल से मुक्त कराया। उन्होंने क्रांतिकारियों को ब्रिटिश सेना के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रेरित किया। उन्होंने दिल्ली पर कब्जा करने के लिए क्रांतिकारियों की सेना का नेतृत्व किया।

धन सिंह 1857 क्रांति के एक वीर योद्धा और नेता थे। उन्होंने क्रांति के दौरान वीरता और बलिदान का प्रदर्शन किया। उनकी वीरता और बलिदान को आज भी याद किया जाता है।

आज भी परिवार में देशसेवा का जज़्बा कायम
तस्वीर सिंह चपराना कहते हैं कि उन्हें गर्व है कि उनके पूर्वज ने आज़ादी की पहली लड़ाई में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने बताया कि आज भी उनके परिवार के लिए देश सर्वोपरि है और सेवा का जज़्बा बरकरार है. इतिहास के पन्नों में धनसिंह कोतवाल का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. मेरठ में जब पहली बार स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा था, तब वही पहले योद्धा थे जिन्होंने अंग्रेजों को सीधी चुनौती दी थी

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!